एंटीवायरस क्या है, यह काम कैसे करता है

नमस्कार दोस्तों, अगर आप स्मार्टफोन या कंप्यूटर का प्रयोग करते हैं तो आप वायरस (Virus) के बारे में जानते ही होंगे। यह ऐसे द्वेषपूर्ण प्रोग्राम होते हैं जिनका मकसद केवल आपके कंप्यूटर और स्मार्टफोन को क्षति पहुंचाना होता है। यह आपकी निजी जानकारी को चुरा सकते हैं या नष्ट कर सकते हैं। यदि आप वायरस के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं।
वायरस क्या होते हैं, अपने कंप्यूटर और स्मार्टफोन को इससे कैसे बचाएं


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एंटी वायरस(Antivirus) क्या है

 आज हम बात करेंगे एंटीवायरस(Antivirus) के बारे में, एंटीवायरस एक प्रकार का सॉफ्टवेयर होता है जो कंप्यूटर से वायरस(Virus), वर्म्स(Worms) और अन्य मालवेयर(Malware) का पता लगाता है, और उन्हें रोकता है या हटाता है।
एंटीवायरस(Antivirus) को एंटीमैलवेयर(Antimalware) सॉफ्टवेयर के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह सिस्टम में मैलवेयर(Malware), स्पाइवेयर(Spyware) आदि  द्वेषपूर्ण प्रोग्राम्स का पता लगाने तथा उन्हें डिलीट करने में सक्षम होता है।
एंटीवायरस का निर्माण मुख्य रूप से सिस्टम में छिपे वायरस(Virus) का पता लगाने तथा उन्हें नष्ट करने के लिए किया गया है। वर्तमान समय के अत्याधुनिक तकनीक के एंटीवायरस किसी  सिस्टम में एडवेयर(Adware), स्पाइवेयर(Spyware), रंसोमवेयर(Ransomware), कीलॉगर(Keyloggers), बैकडोर(Backdoors), टॉर्जन हॉर्स(Trojan Horse) आदि खतरनाक प्रोग्राम से यूजर के डाटा को सुरक्षित करता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं आज के समय में इंटरनेट पर सभी काम ऑनलाइन हो रहा है जैसे की बैंकिंग।
 बैंकिंग कार्यों में यूजर्स के डाटा को गोपनीय रखा जाता है, यदि सिस्टम में एंटीवायरस का प्रयोग ना किया जाए तो हैकर्स आसानी से डाटा चुरा सकते हैं, और कहीं और भेज सकते हैं, या उसका गलत उपयोग कर सकते हैं।
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एंटीवायरस कैसे कार्य करता है

जब भी कोई फाइल या प्रोग्राम सिस्टम में इंस्टॉल होता है तो एंटीवायरस उस फाइल या सॉफ्टवेयर को स्कैन करता है, यदि इनमें से कोई फाइल या प्रोग्राम एंटीवायरस प्रोग्राम के विशिष्ट सूचक से मेल खाता है तो एंटीवायरस प्रोग्राम को वायरस की श्रेणी में वर्गीकृत कर देता है।
 नियमित सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर को बदलने या मिटाने का प्रयास नहीं करते इसलिए इस क्रिया को दुर्भावनापूर्ण व्यवहार माना जाता है इसलिए एंटीवायरस यह तय करता है कि इसे वायरस की श्रेणी में रखना चाहिए।
एंटीवायरस जब अपने डेटाबेस में उपलब्ध जानकारी को फाइल के रूप में स्कैन करता है तो अगर डेटाबेस में कोई पैटर्न सामान(Duplicate) होता है तो इस स्थिति में एंटीवायरस उसे वायरस का नाम दे देता है।
जब एंटीवायरस किसी वायरस को पहचान लेता है, तो  वह तुरंत यूजर को सूचित कर देता है, और वह यूजर के सामने विकल्प भी प्रस्तुत कर देता है। यूजर अपनी जानकारी और सुझाए गए विकल्पों के आधार पर किसी एक विकल्प का का चुनाव करके वायरस को नष्ट कर करता है।
 इस प्रकार हमारा कंप्यूटर पुनः पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है और हम उसका प्रयोग पूरी तरह सुरक्षित रूप से कर सकते हैं।


एंटीवायरस क्यों आवश्यक है

दोस्तों हम में से बहुत से यूजर्स(Users) को लगता है कि हमारा कंप्यूटर तो इंटरनेट से कनेक्ट नहीं है फिर हमें एंटीवायरस की क्या आवश्यकता है? तो दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगा कि हम इंटरनेट के अलावा भी अपने कंप्यूटर पर बहुत से ऐसे कार्य करते हैं जिसके द्वारा वायरस आने का खतरा बना रहता है जैसे कि हम पेन ड्राइव या डीवीडी को अपने कंप्यूटर में इन्सर्ट (insert) करते हैं तो यदि वह पेनड्राइव या डीवीडी वायरस से इनफेक्टेड है तो उसमें मौजूद वायरस हमारे कंप्यूटर में आ जाएंगे।
आज कंप्यूटर के साथ साथ हमारे अन्य डिवाइस जैसे स्मार्टफोन या टेबलेट भी लगातार  वायरस की चपेट में आ रहे हैं। तो मैं आपको यही सुझाव दूंगा कि आप अपने कंप्यूटर में एक अच्छा सा एंटीवायरस इंस्टॉल करके रखें जिससे आपका डाटा सुरक्षित रहे।
और स्मार्टफोन में कोशिश कीजिए कि जब भी आप कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो उसे प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें कोई भी अन्य थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड ना करें।
इस बात का खास ध्यान रखें कि यदि आप कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो यह जांच लीजिए कि वह आपसे कोई ऐसी परमिशन तो नहीं ले रही जिसकी उस ऐप को कोई आवश्यकता नहीं है यदि वह ऐप कोई ऐसी परमिशन आपसे मांगती है तो सावधान हो जाइए इससे आपके डेटा को खतरा हो सकता है।
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एंटीवायरस स्कैन के प्रकार


और पाया जाना भी जरूरी है कि एंटीवायरस सिस्टम को प्रोटेक्ट करने के लिए कितने तरीकों से स्कैन करता है मुख्य रूप से एंटीवायरस प्रोग्राम नियमित स्टैंडअप ऑफर करते हैं हार्ड ड्राइव में अज्ञात वायरस की तलाश करते हैं लेकिन मॉडल ने सिक्योरिटी सलूशन स्कैनिंग की पूरी सेवा प्रदान करते हैं इनमें On Demand Scaning व Real Time Protection दोनों शामिल हैं।

1. On Demand Scanning::

यह स्कैनिंग उस समय शुरू होती है जब उपयोगकर्ता रिक्वेस्ट करता है या शेड्यूल सेट करता है। यह स्कैन या तो एक प्रीवेंटिव मेंटिनेस एक्टिविटी के रूप में उपयोग किया जाता है या जब वायरस डिटेक्ट होता है तब उपयोग में लाया जाता है।

2. Real Time Protection::

यही स्कैनिंग ऑटोमेटिक स्कैनिंग से संबंधित है एंटीवायरस ऑफर करते हैं यह रियल टाइम में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को मॉनिटर करता है और इसका डाटा एक्टिव मेमोरी में लोड होता है।
इस प्रकार की स्कैनिंग से सिस्टम की परफॉर्मेंस कम हो सकती है लेकिन सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है।

फ्री और पेड एंटीवायरस में अंतर

एंटीवायरस के फ्री और पेड वर्जन के बीच मुख्य अंतर यह है कि फ्री एंटीवायरस में आपको पूरी सुविधा नहीं मिलती जबकि पेड एंटीवायरस में आपको कुछ एडवांस फीचर मिलते हैं जोकि आपकी कंप्यूटर की सुरक्षा को और अधिक बढ़ा देते हैं।


कुछ बेहतरीन एंटीवायरस

वैसे तो आपको मार्केट में बहुत सारे एंटीवायरस मिल जाएंगे लेकिन हम आपको कुछ ऐसे हैं कि बस के बारे में बताएंगे जोकि बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
◆ Avast Antivirus
◆McAfee Antivirus Plus
◆Kaspersky Antivirus
◆Quickheal Antivirus
◆Symantec Norton Antivirus
◆Bitdefender Antivirus Plus
◆Trend Micro Antivirus 
◆F-Secure Antivirus SAFE

तो दोस्तों ये थी एंटीवायरस से जुड़ी कुछ जरूरी बातें, अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों को भी शेयर करें और अगर आपके कोई सवाल या सुझाव हैं तो हमे कमेंट बॉक्स के माध्यम से जरूर बताएं।

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