इंटरनेट स्पीड टेस्ट काम कैसे करता है how Does speed test work in Hindi

Speed Test काम कैसे करता है

बहुत बार आप जब इंटरनेट यूज करते होंगे तो आपका इंटरनेट धीमा हो जाता होगा और आप सोचते होंगे कि क्यों ना एक बार अपने इंटरनेट की स्पीड चेक करी जाए और आप किसी स्पीड टेस्ट एप या वेबसाइट के द्वारा आप अपने इंटरनेट की स्पीड चेक कर लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आखिर ये स्पीड टेस्ट काम कैसे करते हैं तो चलिए आज हम इसी के बारे में चर्चा करते हैं ऐसी बहुत सी ऐप्स और वेबसाइट है जहां जाकर आप अपने इंटरनेट का स्पीड टेस्ट कर सकते हैं।
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Speedtest kam kaise karta hai

 इनमें से सबसे पॉपुलर स्पीड टेस्ट speedtest.net जो ओखला के नेटवर्क का प्रयोग करता है और दूसरा fast.com  जो नेटफ्लिक्स के सरवर द्वारा ऑपरेट किया जाता है।
 ये हो गए कुछ पॉपुलर स्पीड टेस्ट नेटवर्क। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि आखिर स्पीड टेस्ट काम कैसे करता है तो चलिए इसके बारे में भी जान लेते हैं। जब भी आप किसी स्पीड टेस्ट को परफॉर्म करते हैं तो सबसे पहले एक पिंग टेस्ट किया जाता है मतलब जो आपका स्मार्टफोन या कंप्यूटर है वह एक पैकेट का सिग्नल भेजता है और पिंग पता लगाता है कि आपके सबसे पास में कौन सा सरवर है जिससे उस पैकेट को पहुंचाने में और वापस लाने में कम से कम समय लगे।
 इसे लेटेंसी(विलंबता) कहा जाता है जिस सरवर की लेटेंसी ज्यादा कम होगी उसी सर्वर से आगे स्पीड टेस्ट परफॉर्म किया जाएगा।
जब पता चल गया कि सबसे पास में कौन सा सरवर है तो उससे स्पीड टेस्ट परफॉर्म किया जाएगा।
 उसके लिए जो क्लाइंट(ग्राहक) है, वह सरवर के साथ अनेकों कनेक्शन बनाता है मतलब जब क्लाइंट ने अलग-अलग प्रकार के सरवर बना लिए तो वह क्लाइंट से डाउनलोड की रिक्वेस्ट करता है फिर इसके बाद सर्वर एक छोटा सा डाटा लेता है और उसे क्लाइंट को भेज देता है जिससे उसकी स्पीड को कैलकुलेट किया जा सके और उस डाटा का साइज इस तरीके से डिसाइड किया जाता है कि जो आपके नेटवर्क की अधिकतम कैपेसिटी है उसका उपयोग किया जा सके।
 जब एक बार छोटा डाटा क्लाइंट के पास पहुंच जाता है तो उसके बाद क्लाइंट और डाटा की मांग करता है इसका मतलब यह है कि जब पिछली बार उसने कम साइज का डाटा भेजा तो अब वह अगली बार उससे बड़ी साइज का डाटा भेजें। और यह प्रक्रिया एक तय समय सीमा तक लगातार चलती रहती है।
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 तो यही सब करके हमारे इंटरनेट की स्पीड का पता लगाया जाता है। और असलियत में स्पीड जो आपके क्लाइंट की मशीन या कंप्यूटर है जिस पर स्पीड टेस्ट किया जा रहा है डायरेक्टर उसी पर स्पीडटेस्ट को कैलकुलेट किया जाता है। तो अब आप समझ गए होंगे कि स्पीड टेस्ट कैसे काम करता है। अब इसके बाद बात करते हैं अपलोड स्पीड की अपलोड स्पीड को कैसे टेस्ट किया जाता है?
 यह भी बिल्कुल डाउनलोडिंग की स्पीड के जैसा होता है यानी कि शुरू में कम डाटा जाता है और उसके बाद धीरे-धीरे डाटा बढ़कर जाने लगता है और जब अंत में सभी डाटा उसके पास पहुंचता है तो  क्लाइंट स्पीड कैलकुलेट करता है जिससे आपको पता चलता है कि हमारे इंटरनेट की असली स्पीड क्या है और अपलोड स्पीड को भी एक तय समय सीमा तक परफॉर्म किया जाता है।
आपने कई बार देखा होगा कि किसी जगह पर आपको डाउनलोड स्पीड ज्यादा मिलती है और अपलोड स्पीड कम और कहीं पर अपलोड स्पीड ज्यादा मिलती है और डाउनलोड स्पीड कम। तो इसी तरीके से दोनों का समय एक जैसा ही रखा गया है और इसी तय समय तक स्पीड टेस्ट तो कैलकुलेट किया जाता है। यही कुछ तरीके हैं जिसके द्वारा स्पीड टेस्ट नेटवर्क हमारे इंटरनेट की स्पीड को चेक करता है और पता लगाता है कि हमारे इंटरनेट की स्पीड कितनी है।

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