हिंदी कविता– मंजिल | Hindi poem

नमस्कार, आज हम आपके लिए दिव्येंश घेडिया की बहुत अच्छी हिंदी कविता Hindi Poem लेकर आए हैं, इस कविता Hindi poem के जरिए हमें यह जानने को मिलता है कि अपनी मंजिल तक जाने के लिए एक व्यक्ति को किन–किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जीवन में हर एक व्यक्ति अपनी मंजिलों तक पहुंचना चाहता है और वह वहां तक पहुंचने के लिए कठिन परिश्रम भी करता है लगभग हर एक व्यक्ति चाहता है कि मैं जीवन में कुछ कर सकूं या कुछ बन सकूं।

 जिससे मैं अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकूं।
 इसी चाह में वह व्यक्ति मेहनत करता है।
तो चलिए इस कविता को पढ़ते हैं और इसमें छिपी भावनाओं को समझने की कोशिश करते हैं–

Poem in Hindi


रोज सोने से पहले, सपना मंजिल का देखता हूं,
और उसकी चाहत में, रोज सवेरे उठता हूं।।

मंजिल की इस दौड़ में, ये भीड़ कहां जा रही है,
कभी किसी से आगे हूं, कभी मैं पीछे चलता हूं।।

आगे निकलना इतना आसान नहीं है इसलिए,
नई तरकीबें या नई राह में चुनता हूं।।

शतरंज के इस खेल में, एक तरफ मंजिल है,
दूसरी तरफ मैं ही राजा, रानी, हाथी, घोड़ा, मोहरा हूं।।

यह दौड़ भी कितनी अजीब है, खत्म ही नहीं होती,
फिर भी कुछ हासिल करने की, कोशिश करता रहता हूं।।

राह में गिरता, संभलता, रुकता और फिर दौड़ता हूं,
पर आखिर में अपने आप को, एक कफ़न में लिपटा पाता हूं।।

रोज सोने से पहले सपना मंजिल का देखता हूं।।।

–दिव्येंश घेडिया



मुझे उम्मीद है आपने इस कविता (Hindi Poem) को पढ़ा और समझा।
इस कविता (Poem in Hindi) में कवि कहना चाहते हैं कि वह व्यक्ति जिसे अपनी मंजिल तक पहुंचना है वह रोज सोने से पहले अपने उस मंजिल तक पहुंचने का सपना देखता है और उसी मंजिल को पाने के लिए वह रोज सवेरे जल्दी उठता है। 

हर एक व्यक्ति अपनी मंजिल को पाना चाहता है इसलिए हर एक व्यक्ति अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करता है इस कारण कोई व्यक्ति कभी किसी से आगे निकल जाता है या फिर पीछे ही रह जाता है।

जो व्यक्ति पहले से ही इस दौड़ में आगे चल रहा है उसे पीछे करना इतना आसान नहीं होता इसलिए उसे पीछे करने के लिए हमें खुद उससे हटकर और उससे अलग नई रणनीति बनाकर चलना होगा तभी जाकर हम अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

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यह एक शतरंज का खेल जैसा है जिसमें सामने मंजिल है और उस मंजिल को पाने वाला व्यक्ति राजा, रानी, हाथी, घोड़ा और मोहरा खुद ही है, हमें खुद ही ऐसी रणनीति बनाकर चलना होगा जिसके द्वारा अपनी मंजिल तक पहुंचा जा सके।

राहों में सभी कठिनाइयों का सामना करके हमें चलते रहना है गिरना और संभलना तो लगा रहता है इसे कभी डरना नहीं है अगर हम ऐसा कर लेते हैं तो हम निश्चित ही अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे लेकिन इतना सब करने के बाद अंत में हम अपने आप को कफन में लिपटा पाते हैं।
यही तो जीवन है जिसमें हमें लगातार संघर्ष करना पड़ता है और अंत में दुनिया से अलविदा कह देते हैं।

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